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Short Moral Story in Hindi | गरीब माँ और जादुई चूल्हा

Short Moral Stories in Hindi for Kids

नमस्कार दोस्तों, आज मैं फिर आपके लिए एक नए Short और Moral Story in Hindi को लेकर हाजिर हूँ। आज हम पढ़ेंगे “गरीब माँ और जादुई चूल्हा” वाली कहानी कैसे गरीब माँ को जादुई चूल्हा मिलता है जो गरीबी के कारण एक दिन का खाना नहीं खा पाती थी। जादुई चूल्हे के कारण रोजाना अच्छे-अच्छे खाना खाने लगती है। अगर आपको हमारी कहानी (Short Moral Story) पसंद आई तो कमेन्ट जरूर करिएगा। चलिए शुरू करते है Short Moral Story in Hindi for Kids

गरीब माँ और जादुई चूल्हा | Short Moral Story in Hindi

एक बार की बात है अकबरपुर नामक गाँव में एक राधा नाम की विधवा अपने बेटे रमेश के साथ रहती थी। राधा का पति तभी चल बसा था जब उसका बेटा 1 साल का था। राधा अपना और अपने बेटे की जीविका गाँव के पास जंगल में जाकर चुने हुए लकड़ियों को बेचकर चलाती थी।

राधा रोजाना जंगल में जाकर लकड़ियाँ इकठठा करके लाती और बाजार में जाकर बेच देती, बेचने के बाद जो पैसा मिलता उसका राशन लेकर आती थी। इस तरह दोनों अपनी जिंदगी जी रहे थे। धीरे-धीरे समय बीतता गया। अब रमेश 8 साल का हो गया था। वो अपने घर का ध्यान रखने लगा था राधा अब उसको साथ में बाजार नहीं ले जाती थी।

एक दिन राधा को बाजार से आने में देर हो गई शायद उस दिन उसने लकड़ियाँ भी नहीं बेची थी। रमेश को बहुत भूख लगी थी। वो यही सोच रहा था माँ अभी बाजार से लकड़ियाँ बेचकर नहीं आई। बहुत देर इंतेजार के बाद माँ आई।

रमेश ने कहा माँ जल्दी से खाना बना दो मुझे बहुत भूख लगी है मेरे पेट में चूहे कूद रहे है। राधा ने कहा बेटे आज जंगल में ज्यादा लकड़ियाँ नहीं मिली जो मिली थी उसको बेचने के बाद मैंने साहूकार के पुराने पैसे चुकता करके आई हूँ। आज कुछ भी खाने को नहीं है। इतना कहकर उसकी माँ रोने लगी।

रमेश बड़ा ही समझदार और ईमानदार लड़का था उसने कहा रोओ नहीं माँ कोइ बात नहीं आज नहीं तो कल खाना खा लेंगे। तुम देखना एक दिन मैं बहुत बड़ा अफसर बनूँगा जिसके बाद मैं खूब पैसे कमाऊँगा हमारा एक बड़ा घर होगा। तब हमें खाना खाने में कभी भी परेशानी नहीं होगी फिर हम पेट भर खाना खाएंगे।

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इसके बाद दोनों सो गए। सुबह दोनों उठे तो देखा कि बहुत जोरों से बारिश हो रही है, बारिश रुकने का नाम नहीं ले रही थी। राधा ने कहा अब मैं लकड़ियाँ कैसे चुनने जाऊँगी। बारिश के वजह से सुखी लकड़ियाँ नहीं मिलेगी। सुखी लकड़ियाँ ही बाजार में बिकती है। रमेश ने कहा तुम परेशान नहीं हो माँ हम जंगल के दूसरे छोर तक लकड़ियाँ चुनने जाएंगे।

बारिश दिन भर हुई रात में बारिश थोड़ी रुकी। रमेश ने कहा चलो माँ लकड़ियाँ चुनने चलते है राधा ने कहा नहीं बेटे रात को जंगल में लकड़ियाँ चुनने नहीं जाएंगे जंगल के दूसरे तरफ शेर रहता है। इस तरफ सभी लकड़ियाँ गीली मिलेगी। रमेश ने कहा माँ अभी तुम लकड़ियाँ चुनने चलोगी तो कल सुबह बेच सकोगी तभी जल्दी से हमें खाना मिलेगा।

रमेश की बात सुनकर राधा अपने बेटे के साथ रात में ही जंगल में लकड़ियाँ चुनने चली गई। सुखी लकड़ियों के तलाश में दोनों जंगल में काफी अंदर तक चले गए। राधा इधर-उधर घूम कर देख रही थी तभी अचानक रमेश गायब हो जाता है। फिर राधा अपने बेटे को अपने पास ना पाकर बेटे रमेश – बेटे रमेश चिलाने लगती है और बुलाती है।

रमेश थोड़ी देर बाद सामने से चलकर आता है माँ कहती है कहा चले गए थे बेटे – रमेश कहता है माँ जंगल के शेर को बहुत चोट लगी हुई है ये बूढ़ा भी हो गया है। शेर के चोट को ठीक करने के लिए मैं जड़ी बूटी लेने चला गया था। बस देर हो गई। रमेश के पीछे खड़े शेर को देखते ही राधा सन्न रही गई।

राधा ने कहा जल्दी से भाग आओ मेरे पास नहीं तो शेर तुम्हें खा जाएगा। रमेश ने कहा तुम डरों नहीं माँ शेर हमारा साथी बन गया है वो हमे नहीं खाएगा।

शेर ने भी ऐसा ही किया। थोड़ी देर बाद शेर ने कहा तुम दोनों ने मेरी मदद की है मेरा जान बचाया है मांगों तुम्हें उपहार में क्या चाहिए। रमेश ने कहा हमें उपहार में कुछ नहीं चाहिए।

शेर ने कहा नहीं कुछ न कुछ उपहार तुम मांगों रमेश ने कहा मेरा उपहार यही है कि बस तुम जंगल में आने वाले किसी भी मनुष्य और जीव पर हमला नहीं करोगे।

शेर हसते हुए बोला बस इतनी सी बात मैं वचन देता हूँ मैं किसी भी जीव का शिकार नहीं करूंगा आज से मैं शाकाहारी जीवन जीऊँगा। इसके बाद भी शेर ने कहा, लो मैं तुम्हें ये जादुई चूल्हा देता हूँ।

जादुई चूल्हे से तुम्हें कभी भी खाने की कमी नहीं होगी। जादुई चूल्हे पर जो भी पकवान बनेगा वो कभी कम नहीं होगा। ये चूल्हा सिर्फ तुम दोनों की ही बात मानेगा।

जादुई चूल्हे को लेकर राधा और रमेश घर पहुंचे। दोनों बहुत खुश थे। दोनों रोजाना नए – नए पकवान बनाकर खाने लगे। राधा ने जंगल में लकड़ियाँ चुनने का काम छोड़ दिया था। धीरे-धीरे समय गुजरता गया और रमेश काफी बड़ा हो गया राधा थोड़ी बूढ़ी हो गई थी।

रमेश को घर बैठे खाना मिल जाता था इसीलिए उसने अभी तक कोइ काम धंधा का भी नहीं सोचा था। वो बिल्कुल निष्क्रिय हो गया था। इस बात की चिंता उसकी माँ राधा को होने लगी।

एक दिन राधा ने अपने बेटे से कहा बेटे कब तक हम दोनों जादुई चूल्हे के भरोशे बैठे रहेगे क्यू नहीं तू शहर जाकर कहीं नौकरी वोकरी देखता। कब तक तू यू बैठा रहेगा। जादुई चूल्हा सिर्फ खाना दे सकता है।

रमेश अपनी माँ की बात सुनकर अपना मुंह उधर कर लेता है और कहता है माँ जादुई चूल्हे से हमे घर बैठे खाना खाने को मिल रहा है जादुई चूल्हे के वजह से हम रोज अच्छे अच्छे पकवान खाते है और तू कहती है मैं शहर कमाने चला जाऊ। माँ जब घर बैठे खाना मिल ही रहा है तो मैं कहीं नौकरी करके अपना पसीना क्यूँ निकालू।

रमेश की बात सुनकर बूढ़ी माँ कुछ नहीं कहती है वो सुनकर सोने चली जाती है। एक दिन जादुई चूल्हा घर में से ही गायब हो जाता है। राधा और रमेश दोनों सन्न रह जाते है। रमेश जादुई चूल्हा बहुत ढूंढता है परंतु उसे कहीं नहीं मिलता है। रमेश कहता है मुझे पता है माँ हमारा जादूई चूल्हा कौन चुरा सकता है। हो न हो ये हमारे पड़ोसियों का काम है उन्होंने ही हमारा चूल्हा चुराया है।

राधा कहती है। अब तो तू शहर जाकर नौकरी कर देख हमने इतने साल से बैठकर खाना खाया और अपना शरीर भी नहीं चलाया। इसीलिए अन्न देवता नाराज हो गए है। जादुई चूल्हा जादू से गायब हो गया। अब तू शहर नहीं गया तो हम भूखे मर जाएंगे।

रमेश घर पर आसानी से मिल रहे खाना और आराम को ही अपना दुनिया समझ चुका था। परंतु जादुई चूल्हा खोने के बाद रमेश समझ चुका था अब मुझे शहर नौकरी करने जाना पढ़ेगा।

रमेश अगले दिन ही शहर नौकरी करने चला गया। राधा भी यही चाहती थी। रमेश 5 साल बाद शहर से कमा कर अपने गाँव अकबरपुर आया। रमेश और उसकी माँ का रहन-सहन बदल चुका। जब से रमेश शहर गया तभी से अच्छा पैसा कमाया तभी उसने अच्छा घर और अमीर बन चुका था।

घर पर आते ही रमेश को किचन में जादुई चूल्हा दिखा। रमेश ने अपनी माँ से कहा माँ तुमने तो कहा था जादुई चूल्हा खो गया। यहाँ कैसे आ गया।

राधा ने कहा बेटे वो तो तुझे शहर भेजने के लिए मैंने जादुई चूल्हे को छुपा दिया था। तभी तो तू शहर गया और इतना बड़ा आदमी बना। तू शुरू से ही अमीर होने के सपने देखता था। आज तू बड़ा आदमी बनकर आया है।

तू ठीक कहती है माँ आज तुम्हारे वजह से मैं आज बड़ा आदमी बन पाया हूँ। ये सब तेरी वजह से हुआ है।

कहानी यही समाप्त होती है।

Conclusion

Short Moral Story in Hindi for Kids आज के इस कहानी में हमने गरीब माँ और जादुई चूल्हे के बारे में पढ़ा और यह जाना की थोड़े से सुख के खातिर हमे अपने सपनों को कभी नहीं भूलना चाहिए। हमें कठिन निरंतर अभ्यास करते रहना चाहिए जब तक की हमें अपना लक्ष्य नहीं मिल जाता है। Short Moral Story in Hindi for Kids

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