दुनिया के नए सात अजूबे जिसको बहुत कम लोग जानते हैं चित्र सहित बताया गया है The New Seven Wonders Of The World

प्राचीन काल से ही पृथ्वी पर अनेक सभ्यता रह कर चली गई अनेक राजाओ और शासकों ने पृथ्वी पर अलग -अलग तरीके से राज किया हैं और कुछ ऐसे चीजों का निर्माण कर के चले गए हैं मानो तो आज के समय में बनवाना नामुमकिन सा लगता हैं अगर बन भी जाए तो उसका पैसा इतना लगेगा आप कल्पना भी नहीं कर सकते आज के पोस्ट में हम जानेगे की दुनिया के सात अजूबे कौन-कौन से हैं।

दुनिया के नए सात अजूबे The New Seven Wonders Of The World, दोस्तों दुनिया में आश्चर्य और अजूबों चीजों का जानने का प्रचलन आज से बल्कि प्राचीन काल से कौतूहल का विषय बना रहा मानव ने जहां पृथ्वी पर खूबसूरत और अजूबों को बनाया उनकी कला के कायल आज भी देश दुनिया के बहुत बड़े चित्रकार हैं और शिल्पकार हैं।

दुनिया में अजूबों के बारे में जानने का जिज्ञासा हेरोडोटस और कैलिमाचस को जाता हैं क्योंकि हेरोडोटस और कैलिमाचस ही वह व्यक्ति थे। जिसने दुनिया के आश्चर्य के देने वाले कलाओ की सूची तैयार की।

आप को बता दे की हेरोडोटस (484 ई. पू. से 425 ई. पू.) एलेक्जेंड्रिया के संग्रहालय में इतिहासकार थे और कैलिमाचस (305 ई. पू. से 240 ई. पू.) साइरेन के बहुत बड़े विद्वान थे।

इनके द्वारा जो सूची तैयार की गई उनमें से सिर्फ एक ही धरोहर ऐसे हैं जो आज तक सुरक्षित हैं और तो प्राकृत आपदा और मानवीय कारणों से ध्वशत हो गए पर पूरी तरह से नहीं खत्म हुवे हैं कुछ शेष बचे हुवे हैं।

दुनिया के पुराने सात अजूबे जो हेरोडोटस और कैलिमाचस के द्वारा चुने गए।

  • गिज़ा का महान पिरामिड
  • एलेक्ज़ेन्ड्रिया का लाइटहाऊस
  • मौस्सोल्लस का मौसलियम हैलिकैर्नैस्सस
  • आर्टेमिस का मंदिर
  • ओलिम्पिया का ज़ियूस मूरत
  • बेबीलोन का हेंगिग गार्डन

इन धरोहरों में बस गिज़ा का महान पिरमिड बचा हुआ हैं और सब धरोहरों में नुकसान के वजह से मुख्य के श्रेणी से निकाल दिया गया हैं।

दुनिया के नए सात अजूबे The New Seven Wonders Of The World

जब दुनिया में पुराने अजूबों की सूची से कुछ धरोहर नष्ट हो गए तो इतिहासकारों और फिल्म निर्माताओ ने 1999 में कुछ पैसों (आकडे के अनुसार 700 डालर) एक वेबसाईट बनाया इस वेबसाईट पर उन्होंने दुनिया भर के लोगों से वोट मांगा सभी धरोहरों पर, कुछ लोगों के वेबसाईट पर वोट दिया अपना और कुछ लोगों ने फोन के जरिए अपना वोट दिया।

बताया जाता हैं की पूरी दुनिया से लगभग 1 अरब लोगों ने वोट किया था। इसके आधार पर दुनिया में नए सात अजूबों की गिनती की गई और एक श्रेणी में किया गया इसके बाद यूनेस्को UNESCO ने अपना मुहर लगा दिया हैं विश्व धरोहर की घोषणा कर दिया।

विश्व धरोहर बनने का मुख्य कारण ये हैं की पूरी दुनिया के लोगों को इसकी जानकारी लग जाती हैं और ऐसे इमारत कहीं भी नहीं बनाया जा सकता हैं। इन इमारतों को बचाने और सजोने के लिए सरकारी फंड आता हैं।

कुछ नियम बनाए गए हैं ऐसे धरोहरों के लिए। जो यूनेस्को ने बनाया है लोगों को इसका पालन करना अनिवार्य हैं।

Duniya ke Saat Ajoobe

  • ताजमहल (भारत)
  • चीन की दीवार (चीन)
  • कोलोसियम (इटली)
  • क्राइस्ट द रिडीमर (ब्राजील)
  • माचू पिच्चू (पेरू)
  • पेत्रा या पेट्रा (जोर्डन)
  • चीचेन इट्ज़ा (मेक्सिको)
ताजमहल Taj Mahal (Agra, India)
ताजमहल Taj Mahal (Agra, India)

भारत के आगरा शहर में स्थित ताजमहल विश्व के सात धरोहरों में से एक हैं। ताजमहल यमुना नदी के किनारे स्थित हैं। ताजमहल को आज से 400 साल पहले सन्न 1643 ई. में बन कर तैयार हो गया था। ताजमहल को भारत के मुगल शासक शाहजहाँ ने अपनी पत्नी मुमताज़ महल के प्यार (पत्नी को उपहार) में बनवाया था। शाहजहाँ और मुमताज़ महल की मृत्यु होने के बाद ताजमहल के अंदर ही दफ़ना दिया गया।

ताजमहल को बनने में 12 से 15 साल का वक़्त लगा और इसमें 20000 से ज्यादा मजदूरों ने काम किया था। यह एक मानव की अद्भुत कलाकृतियों में से एक हैं। ताजमहल पूरे सफेद संगमरमर पत्थर से बनाया हुआ इंसानों का नायाब धरोहर हैं।

ताजमहल एक विश्व पर्यटन का केंद्र हैं हर साल ताजमहल को देखने के लिए देश-विदेश के लाखों लोग आते हैं। महल के चार दरवाजे चारों दरवाजों पर बहुत बड़ा गेट बना हुआ हैं। ताजमहल के चारों तरफ उपवन हैं और आगे की तरफ पानी के फुहारे लगे हुवे हैं जो सबका मन मोह लेते हैं।

सच में ताज नगरी ताजमहल बहुत खूबसूरत हैं। ताजमहल के ठीक पीछे यमुना नदी हैं जिसमें ताजमहल की परछाई साफ दिखाई देती हैं। ताजमहल को यूनेस्को ने 1983 को विश्व धरोहर घोषित किया।

चीन की दीवार Great Wall of China (Beijing China)
चीन की दीवार Great Wall of China (Beijing China)

विश्व के 7 धरोहरों में से एक चीन का महान दीवार बहुत बड़ा स्थान रखता हैं क्योंकि चीन का यह दीवार इतना बड़ा हैं कि पृथ्वी के ऊपर इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) से साफ दिखाई देता हैं।

चीन का यह दीवार चीन के बीजिंग शहर में स्थित हैं, जिसको चीन के प्राचीन राजाओं के द्वारा जो की अलग-अलग राज्यों में राज करते थे उनके द्वारा बनवाया गया हैं इस दीवार को बनवाने के पीछे कारण चीन के बाहरी दुश्मनों से चीन को बचाना था।

इतिहास के अनुसार यह दीवार पहले अलग-अलग भागों में थी जैसे ही शासक आते गए उन्होंने इसको बनवाते चले गए। चीन का दीवार 7वी शताब्दी से लेकर 16वी शताब्दी तक बनवाया गया हैं। चीन के दीवार में कंकड़, मिट्टी, लेई, लकड़ी, पत्थरों तथा अन्य समानों का प्रयोग करके बनाया गया हैं।

यह दीवार इतना लंबा हैं कि यह पूर्वी चीन से लेकर दक्षिणी चीन तक फैला हुआ हैं। इसकी लंबाई 6,700 किलोमीटर से ज्यादा हैं परंतु नवीनतम खुदाई के अनुसार 8,000 किलोमीटर से ज्यादा बताया जा रहा हैं। चीन के दीवार की चौड़ाई लगभग 10 मीटर से ज्यादा हैं। यूनेस्को ने चीन की महान दीवार को 1987 में विश्व धरोहर होने का घोषित किया।

कोलोसियम Colosseum (Rome, Italy)
कोलोसियम Colosseum (Rome, Italy)

कोलोसियम इटली देश की राजधानी रोम में प्राचीन समय का बना आधुनिक विश्व धरोहर हैं। कोलोसियम को उस समय प्रमुख रूप से एक स्टेडियम के रूप में बनाया गया था जिसमें जानवरों की लड़ाइयाँ और जानवरों के साथ इंसानों की लड़ाइयाँ लड़ी जाती थी। इस धरोहर को 72वी शताब्दी से लेकर 70 वी शताब्दी तक बनवाया गया था। कोलोसियम को पूरा करवाया था टाइटस ने जो की यहाँ का शासक था।

कोलोसियम अंडाकार हैं जिसमें 50,000 दर्शकों के बैठने के लिए बनवाया गया था। उस समय यह आकडा बहुत ही बड़ा था। कोलोसियम आज पर्यटन का केंद्र बन चुका हैं यहाँ पर लाखों लोगों हर साल घूमने जाते हैं।

क्राइस्ट द रिडीमर Christ the Redeemer (statue) (Rio de Jeneiro, Brazil)
क्राइस्ट द रिडीमर Christ the Redeemer (statue) (Rio de Jeneiro, Brazil)

क्राइस्ट द रिडीमर एक जिसुस क्राइस्ट का स्टैचू हैं जो की ब्राजील के रियो शहर में बनाया गया है। इस स्टैचू को 1922 से लेकर 1931 के बीच ब्राज़ीलियन इंजीनियरो बनवाया ने बनाया था।

इस प्रतिमा का आधार 9.5 मीटर हैं और प्रतिमा को लेकर 39.6 मीटर ऊँचा हैं और लगभग 30 मीटर चौड़ा हैं। इस प्रतिमा का भार 635 टन हैं जिसुस का क्राइस्ट का यह प्रतिमा बहुत ही भव्य हैं इस प्रतिमा को तिजुका नैशनल पार्क के कोरकोवाड़ों पर्वत पर बनाया गया हैं यह पर जाने पर पूरा रियो शहर दिखाई देता हैं।

माचू पिच्चू Machu Picchu (Peru)

माचू पिच्चू विश्व धरोहरों में एक अलग स्थान रखता हैं। माचू पिच्चू 15 वी शताब्दी में बनाया गया था यह दक्षिण अमेरिका देश के पेरू में स्थित हैं। उरुमबा घाटी से सटा हुआ हैं इसी के बगल से उरुमबा नदी बहती हैं जो हरियाली को बनाए हुवे हैं।

माचू पिच्चू को 7 जुलाई, 2007 को कीश्व धरोहर के रूप में घोषित कर दिया गया आज कल यह जगह पर्यटन का जगह बना हुआ हैं।

पेट्रा Petra (Jordan)
पेट्रा Petra (Jordan)

पेट्रा या पेत्रा यह भी एक विश्व धरोहरों में से एक हैं यह जोर्डन में स्थित एक एतिहासिक जमीन हैं। पेट्रा 264 वर्ग किलोमीटर में सुदूर फैला एक पहाड़ी हैं इसमें यह खास हैं की यहाँ जीतने भी कलाकृतियाँ बनाई गई हैं वो कठोर पत्थरों को तराश कर बनाई गई हैं।

इसके इतिहास में अनुमान लगाया जाता हैं कि 300 ईसा पूर्व से 1200 ईसा पूर्व में निर्माण किया गया हैं। पेट्रा होड पहाड़ियों पर बना हुआ आकर्षक कलाकृति हैं मुख्यतः यह होड पहाड़ी में बस हुआ ही हैं। होड पहाड़ी मृत सागर से लेकर अकाबा के खड़ी और उससे आगे तक फैला हुआ हैं।

पेट्रा को भी जुलाई, 2007 में ही विश्व धरोहर होने का मौका मिला हैं। यहाँ हर साल 10 लाख तक पर्यटन आते हैं।

चीचेन इट्ज़ा Chichen Itza (Mexico)
चीचेन इट्ज़ा Chichen Itza (Mexico)

चीचेन इटजा मेक्सिको में यूकाटन प्रायदीप स्थित एक खंडहर रूपी धरोहर हैं। इसका निर्माण माया समुदाय के लोगों ने किया था चीचेन इटजा को ऐसा माना जाता हैं कि 6वी शताब्दी से लेकर 12वी के मध्य निर्माण किया गया।

चीचेन का अर्थ हैं “कुओं का मुहँ” और इटजा का अर्थ हैं “यहाँ निवास करने वाली जनजाति” होता हैं।

चीचेन इटजा को यूनेस्को ने 1988 में विश्व धरोहर के रूप में दर्ज किया था। चीचेन इटजा में जो चित्र में मंदिर दिखाया गया हैं इसमें कुल मिलाकर 365 सीढ़ियाँ हैं।

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