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Chanakya Niti: चाणक्य के अनुसार “घमंड” से, कितना भी दिल के करीब रिश्ता हो टूट जाता है!

Chankya Niti

Chanakya Niti: आचार्य चाणक्य के अनुसार खुशहाल जीवन जीने के लिए किसी भी इंसान के अंदर घमंड नहीं पालन चाहिए। अगर जिसने भी घमंड रूपी विष को अपने अंदर पैदा किया उसका जल्द ही सर्वनाश हो जाता हैं।

आचार्य चाणक्य की नीतियाँ जीवन जीने को सिखाती हैं. चाहे चाणक्य की बातें कितनी भी कड़वी क्यों न हो पर बिल्कुल सच्ची होती है. इतने पूर्व साल पहले उन्होंने किसी भी इंसान के जीवन को लिख दिया था. की इंसान कब गलतियाँ करता है और उसे उसका बहुत ही बड़ा भुगतान करना पड़ता हैं।

आचार्य चाणक्य के विचार भले ही आपको कठोर लगे पर यही जीवन की सच्चाई है. इसीलिए आपको चाणक्य के विचारों को पढ़ना चाहिए और अपने जीवन मे उतरना चाहिए।

घमंड करने से अच्छे से अच्छे रिश्ते भी खत्म हो जाते है चाहे उन रिश्तों कितना भी मिठास क्यों न हो। ये घमंड पैसे का हो सकता हैं या धन दौलत का।

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आचार्य चाणक्य के अनुसार – (Chanakya Niti)

‘जैसे नींबू की कुछ बूंदें दूध और पानी को अलग कर देती हैं। वैसे ही पैसे का थोड़ा सा घमंड, पिता-पुत्र, भाई-बहन और भाई-भाई के रिश्ते को अलग कर देता है।’

चाणक्य कहते है कि नींबू के कुछ ही बूँद अगर दूध मे घोला जाए तो दूध को फाड़ देता हैं दूध और पानी को अलग कर देता हैं। वैसे ही जब इंसान के पास अथाह पैसा या धन-दौलत हो जाता हैं तब वो (नींबू के बूँद) रूपी घमंड को अपने अंदर पालता है और तब वो ये नहीं देखता है कि ये मेरा रिश्ते मे खून मे क्या लगता हैं।

पैसे का घमंड उसको भाई को भाई से, एक पिता को उसके पुत्र से, पुत्र को उसके पिता से, भाई को बहन से इन सबके खून के रिश्तों को भी दर किनार कर भूल कर अपने से अलग कर देता है।

इन खून के रिश्तों मे कड़वाहट आ जाती हैं घमंड से रिश्तों को चूर-चूर कर देता है घमंड। इसीलिए कभी भी घमंड नहीं करना चाहिए क्योंकि जिंदगी मे आप पैसा तो बहुत कमा लेंगे पर कभी भी लाख कोशिशों के बावजूद भी रिश्ते नहीं कमा पाएंगे।

जब इंसान की मृत्यु होती हैं तब इंसान चाहे कितना भी पैसा कमाया हो, धन दौलत बनाया हो वो ऊपर कुछ भी लेकर नहीं जाता सिवाय “दिल” के रिश्तों के अलावा। आप खुद सोचिए आप मर गए हैं तब आपको वही लोग देखने आते है जिनकों अपने सम्मान दिया और अपने रिश्तों के बागडोर मे बांध कर रखा। वो लोग कभी नहीं आते जिनको आपने कभी अपना नहीं समझा।

चाणक्य की ये बातें तब भी सत्य थी आज भी सत्य हैं और आने वाले समय मे भी सत्य रहेगा।

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