ब्लैक होल क्या होता है? What is Black Hole? in Hindi

ब्लैक होल क्या हैं?
ब्लैक होल का इतिहास 
ब्लैक होल कैसे बनता हैं?
ब्लैक होल कितने प्रकार का होता हैं?

ब्लैक होल क्या हैं? What is Black Hole?

M87 Galaxy Supermassive Black Hole 2019

ब्लैक होल Black Hole को हिन्दी में ‘कृष्ण विवर या श्याम विवर’ कहते हैं, ब्लैक होल Black Hole अंतरिक्ष में सबसे छोटे जगह में मौजूद एक गुरुत्वीय पदार्थ या पिंड हैं जो प्रकाश को भी बाहर नही जाने देता हैं ब्लैक होल के गुरुत्वीय जितना क्षेत्र में जीतने भी तारे, ग्रह, पिंड आते हैं सबको निगल लेता हैं कोई भी पिंड या पदार्थ जितना भी इसके पास जाएगा उतना ही इसका गुरुत्वीय बल उस पिंड को तेजी से निगल जाता हैं।

क्योंकि प्रकाश भी इससे बच के बाहर नहीं या सकता इसलिए ब्लैक होल दिखाई नहीं देता है और अदृश्य रहता है ब्लैक होल को तब ही देख सकते हैं जब कोई तारा इसके आस-पास बहुत ही तेज गति से चक्कर लगाता हैं।

ब्लैक होल का घनत्व और द्रव्यमान सूर्य से करोड़ों गुना ज्यादा होता हैं ब्लैक होल हमेशा सूर्य से लाखों गुना बड़े तारों के मरने से बनता हैं और ये लगभग सभी आकाशगंगा (Galaxy) के केंद्र में उपस्थित होते हैं ऐसा ही एक supermassive ब्लैक होल हमारे Milkyway गैलक्सी में मौजूद हैं जिसका नाम Sagittarius A* हैं।

ब्लैक होल के अंदर समय भी कुछ नहीं हैं ये समय को भी निगल लेता हैं। हमारी पृथ्वी और हमारे सबसे नजदीक का तारा कभी ब्लैक होल नहीं बन सकते हैं क्योंकि ब्लैक होल में बनने के लिए किसी भी पिंड के पास सर्वाधिक गुरुत्वीय बल और घनत्व का होना बहुत जरूरी हैं।

Ocean in the Earth

किसी भी ब्लैक होल का पूरा मास उसके केंद्र में एक छोटे से बिन्दु में निहित होता हैं जिसको सेंट्रल singularity कहते हैं और इसके आस पास के गोलाकार सीमा को Event Horizon कहते हैं।

ब्लैक होल का इतिहास? History of Black Hole?

Supermassive Black Hole release Quasar

Black Hole का जिक्र सबसे पहले जॉन मिचेल (John Michell) ने नवंबर 1784 में किया था इसके बाद फ़्रांस के वैज्ञानिक पिएरे साइमन (Pierre Simon) 1796 में अपने एक किताब ‘The System of the World’ में विस्तार से लिखा था।

ब्लैक होल का निर्माण कैसे होता हैं? How are black holes formed?

Formation of Black Hole

ब्लैक होल का निर्माण आमुमन तारों से ही होता हैं आज तक यही सिद्ध होता आया हैं। क्योंकि तारों के अंदर ही इतना द्रव्यमान और गुरुत्वाकर्षण होता हैं कि वो अपने बल से संकुचित हो जाते हैं। जब कोई तारा सूर्य से कई गुना बड़े और ज्यादा घनत्व के साथ बहुत ज्यादा द्रव्यमान होता हैं और अपने मृत अवस्था में रहता हैं तब उसका फ्यूल हाइड्रोजन खतम हो जाता हैं जिसके कारण उसके गुरुत्वाकर्षण बल से दवाब पड़ता हैं और ब्रह्मांड में बहुत ही तेज धमाकों के साथ ऊर्जा का क्षय होता हैं ये धमाका supernova का होता हैं इसके बाद बचे अवशेष से न्यूट्रॉन स्टार में बदल जाता हैं न्यूट्रॉन स्टार का घनत्व और गुरुत्वाकर्षण इतना ज्यादा होता हैं कि वो अपने ही गुरुत्वाकर्षण को झेल नहीं पाता अपने ही गुरुत्वाकर्षण के दवाब के कारण एक critical limit तक संकुचित होता हैं कि इसका समय और आकार दोनों शून्य हो जाता हैं और अदृश्य हो जाता हैं जिसके बाद ब्लैक होल में बदल जाता हैं।

ब्लैक होल ब्रह्मांड में ज्यादा स्थान नहीं घेरते हैं परंतु अपने गुरुत्वाकर्षण के कारण इतने प्रबल होते हैं कि प्रकाश का एक प्रोटॉन भी इससे नहीं बच सकता हैं। इनके गुरुत्वाकर्षण की वृद्धि अपने नजदीकी किसी भी पिंड या पदार्थ को निगलने से होता हैं जितना ही ये अपने अंदर पिंड को समाप्त करते हैं उस पिंड के गुरुत्वाकर्षण को खिचते रहते हैं जिससे और ये प्रबल हो जाते हैं।

ब्लैक होल जब किसी massive तारे को निगलता हैं तो उसके प्रकाश और उसके ऊर्जा से एक चमक निकलता हैं ब्लैक होल जब किसी massive तारे को निगलता हैं तो उसके प्रकाश और उसके ऊर्जा से एक चमक निकलता हैं ये चमक ब्लैक होल के केंद्र से निकलता हैं जिसे Quasar कहते हैं।

ब्लैक होल कितने प्रकार के होते हैं? How many types of Black Hole?

वैज्ञानिकों के द्वारा बताया गया हैं कि ब्लैक होल तीन प्रकार के होते हैं।

  • Primordial Black Hole Or Small Black Holes
  • Stellar Mass Black Hole
  • Supermassive Black Hole

प्राइमॉर्डीअल ब्लैक होल

ये ब्लैक होल सूर्य से छोटे तारों के मरने से बनते हैं ऐसे तारे जो अपने ही ताप और गुरुत्वाकर्षण को नहीं सहन कर पाते हैं छोटे ब्लैक होल के रूप में बदल जाते हैं ये भी हमारे ही बहुत खतरनाक होते हैं। वज्ञानिकों का कहना हैं की ऐसे ब्लैक होल ब्रह्मांड के निर्माण के समय बने थे।

स्टेलर मास ब्लैक होल

ऐसे तारे जो हमारे सूर्य से मास से कई गुण अधिक मास वाले होते हैं और इनका आकार भी सूर्य से कई गुना ज्यादा होता हैं ये भी अपने गुरुत्व बल के दवाब के कारण संकुचित हो जाते हैं। और छोटे ब्लैक होल की तुलना में कई गुना शक्तिशाली होते हैं ये सूर्य के जैसे और और भी बड़े तारों को समाप्त करने में सक्षम होते हैं। ऐसा ब्लैक होल हमारी सौरमण्डल में आ जाए तो पल भर में पूरा सौरमण्डल निगल जाएगा।

सुपरमैसीव ब्लैक होल

ये उन तारों के मरने से बनते हैं जो हमारे सूर्य से कई करोड़ों गुना मास रखते हैं और कई करोड़ों गुना बड़ा होते हैं ऐसे ब्लैक होल में एक आकाशगंगा को एक साथ समाप्त करने की शक्ति होती हैं।

नासा ने सबसे पहले एक सुपरमैसीव ब्लैक होल को देखा था और पता लगाया था M87 गैलक्सी में यह ब्लैक होल मौजूद हैं। जो की हमारे गैलक्सी के ब्लैक होल से कई गुना बड़ा हैं।

सबसे पहले ब्लैक होल की जानकारी हमें गैलक्सी Abc 1277 में मिली थी जिसका ब्लैक होल अपने ही गैलक्सी के 14% भाग को अपने में समाप्त कर चुका हैं और पूरी गैलक्सी का आधा से ज्यादा मास इसके अंदर हैं।

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